चीनी हमारे जीवन को कम करती है

सामान्य मानवीय इच्छा रहती है कि जब तक जीवित रहें तब तक स्वस्थ जीवन जीते रहें जिसमें शरीर के विभिन्न अंग सुचारु रूप से अपना काम करते रहें। शरीर के विभिन्न अंग आयु बढने के साथ अपनी गुणवत्ता धीरे धीरे कम करते जाते हैं। मानवीय अंगों की गुणवत्ता कम होने का एक छोटा सा कारण है। वह यह कि आयु बढने के साथ व्यक्ति की मांसपेशियों का कसाव कम होता है जिससे व्यक्ति के सभी अंगों की क्षमता धीरे धीरे कम होती जाती है। और इसकी गति इतनी कम होती है कि इस ह्रास का पता ही नहीं लगता। और एक  विशिष्ट स्थिति आती है जब इस ह्रास का पता चलता है तब हम विभिन्न चिकित्सापद्धतियों में इलाज ढूंढते हैं और कराते भी हैं। 

यहाँ  सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि हमारा शरीर अपना इलाज स्वयं करता है न कि कोई दवाई। कोई भी दवाई शरीर की सहायता कर सकती है इलाज नहीं कर सकती। हर व्यक्ति/पाठक को सबसे पहले य़ह समझना होगा और यही सच है कि शरीर अपना इलाज स्वयं करता है। इस तरह हम कह सकते हैं कि हमारे शरीर को दवाओं की आवश्यकता ही नहीं है।
अब प्रश्न उठता है कि इतनी सारी दवा कंपनियां लंबवत और आधारवत विस्तार क्यों किये जा रही हैं। साथ ही प्रतिदिन नयी नयी कंपनीज खुलती जा रही हैं और सभी लाभ भी कमा रही हैं।
इसका मुख्य कारण है - समाज के विभिन्न वर्गों का विभिन्न कारणों से शरीर, रोग और दवाओं के प्रति भ्रांतियां बनाए रखना । इसके साथ ही दवा कंपनियों द्वारा इन भ्रांतियों को बढाना और बढावा देना भी शामिल है। (इस विषय पर अलग से एक पुस्तक प्रकाशित हो सकती है) 

अस्तु हमारा विषय है कि जब तक जीवित रहें तब तक स्वस्थ जीवन जीते रहें। 

हम जानते हैं कि शरीर को अपने दैनंदिन कार्यसंपादन हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है और इस ऊर्जा को पूरा करने के लिए  हम भोजन करते हैं। हम ऐसा मानकर चलते हैं जो कुछ कुछ सही भी है किन्तु पूर्ण सच नहीं है। 
हम मान कर चलते हैं कि जो कुछ भी उपलब्ध है, पेट में डाल देना है और बाकी सारा काम शरीर कर लेता है। जब कि सच यह है कि न तो भोजन और न ही पानी मात्र शरीर की ऊर्जा को पूरा करते है। 
हालांकि हम जानते हैं कि इनके अलावा भी अन्य चीजों की आवश्यकता होती है। इस ऊर्जा की आपूर्ति, जैसा हम समझते है, का मुख्य स्रोत शुगर यानि चीनी है। 
यह भी सत्य है कि शरीर को शुगर देने से शरीर की कोशिकाओं में जो प्रक्रिया होती है उसमें कोशिकाओं का नष्ट होना निश्चित है और जब कोशिकाएं सामान्य से अधिक नष्ट होती हैं तो शरीर के नष्ट होने की प्रक्रिया बढ जाती है ऐसे में बुढ़ापा और मृत्यु जल्दी आते हैं। 

यह तो बात रही शुगर यानि मीठे की। अब बात करते हैं चीनी की जो हम बहुतायत से खरीदते और प्रयोग करते हैं। यहाँ यह जानना अति आवश्यक है कि चीनी में, चीनी के साथ हमें और क्या क्या मिलता है।

जान लें कि गन्ना से प्राप्त मिठास के लिए चीनी साफ किया हुआ चीनी मिल का एक उत्पाद है। चीनी बनाते समय सफाई में प्रयुक्त रसायनों में गंधक सबसे आगे जो एक बार इस शरीर में प्रवेश कर गया तो शरीर से बाहर कभी नहीं निकलता है और धीरे धीरे धीरे-धीरे शरीर के अभ्यस्त होने पर भी कोशिकाओं को नष्ट करके शरीर को नष्ट करता जाता है जिसका दोष हम कहीं और डाल कर इलाज कराते हैं। किंतु रोग की जड़ (मूल) कहीं और होती है जिसका इलाज होता ही नहीं है।. 

चलिए जान लीजिए गन्ने से चीनी बनाने कुल 16  रसायनों का उपयोग होता है जिनमें से बहुत सारे हमें चीनी के साथ मिलते हैं और हम अपने शरीर को देते रहते है। जो विभिन्न रोगों के कारण होते हैं और हम इलाज रोगों का नहीं, लक्षणों का करते हैं। 

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